ⓘ मराठीभाषाया: इतिहासविषये बहुजनै: संशोधनं, लेखनं च कृतम् अस्ति । तत्र केचन मतान्तराणि अपि सन्ति । परं सामान्यत: यत् मन्यते तत् वयम् अत्र पश्याम: । मराठीभाषाविकास ..

                                     

ⓘ मराठीभाषा

मराठीभाषाया: इतिहासविषये बहुजनै: संशोधनं, लेखनं च कृतम् अस्ति । तत्र केचन मतान्तराणि अपि सन्ति । परं सामान्यत: यत् मन्यते तत् वयम् अत्र पश्याम: ।

मराठीभाषाविकास: त्रिषु स्तरेषु वैविध्यपूर्णम् दृश्यते इति अभ्यासकानाम् अभिप्राय: । त्रय: स्तरा: यथा - महाराष्ट्री-प्राकृत, अपभ्रंशी, मऱ्हाठी च सन्ति । महाराष्ट्री इत्यस्मिन् स्थाने केचनजना: महारठ्ठी, मरहट्टी इत्येतयो: शब्दयोः योजनां कुर्वन्ति । मराठीभाषया विवेकसिन्धु: इति कविमुकुन्दराजस्य११८८ रचना प्रथमा मन्यते । आद्यग्रन्थेषु विवेकसिन्धु, ज्ञानेश्वरी-भावार्थदीपिका१२९० इति भगवद्गीताभाषान्तरं, लीळाचरित्रं च इत्येतान् प्राचीनग्रन्थान् दीयते । प्रतिष्ठानपैठणस्थाः सातवाहन-प्रशासका: महाराष्ट्रीभाषाया उपयोगं प्रशासनार्थं कृतवन्त: । तदा मराठीभाषा, संस्कृते: च विकास: प्रारब्ध: । मराठा-आधिपत्ये मराठीभाषां राजाश्रयम् आसीत् अत: तस्मिन् कालेऽपि मराठीभाषा विकास, रचना: च अधिका: जाता: । मराठा-आधिपत्यकाले मोरोपन्तः, मुक्तेश्वर, वामनपण्डित एत्येते रचनाकारा: आसन् यै: राजाश्रय: लब्ध: । मराठीभाषाविकासे नाथसाम्प्रदायिकानां महत्त्वपूर्णसहभाग अस्ति । एकनाथी भागवतं, भावार्थ-रामायणं च महत्त्वपूर्णरचनाकार्ये । १९४७ तमे वर्षे स्वातन्त्र्यप्राप्त्यनन्तरं मराठीभाषा राजभाषात्वेन स्वीकृता । अनन्तरं १९६० तमे वर्षे यदा मराठीभाषाधारिता राज्यरचना अभवत् तदा अधिकृततया राज्यभाषा जाता मराठीभाषा । १९३० तमवर्षात् मराठीसाहित्यसम्मेलनम् आरब्धम् ।

                                     
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