ⓘ भारतस्य नद्यः. इति श्लोकः भारतीयसंस्कृतौ अविनाभावेन अस्ति । प्रातरुत्थाय भूमौ पादन्यासात् पूर्वं तस्याः क्षमां प्रार्थयति मानवः । तत्र तस्याः वर्णने पर्वताः एव ..

पद्मानदी

पद्मा बांलादेशस्य एका प्रधाना नदी । इयं हिमालयोत्पन्नगंगालनद्याः प्रधानशाखा वांलादेशस्य द्वितीयदीर्घतमनदी । वांलादेशस्य गुरुत्वपूर्णनगरी राजशाही इयं पद्मायाः उत्तरतीरे स्थितः । पद्मायाः सर्वोच्चोता १५७१ ‍ फुट् सामान्यतोच्चता ९६८ फुट् । वांलादेशस्य नद्याः उच्चता १२१ किलेमिटर । वांलादेशे जलोन्नयनपर्षदेन पद्मानद्याः प्रदत्तपरिचितिसंख्या उत्तरस्य नदी नं ३२ । राजा राजवल्लभस्य कीर्ती पद्मायाः भाङ्नगरस्य प्रान्तभागे विनष्टेन पद्मायाः अपरः नाम कीर्तिनिशा । हिमालयस्य गङ्गोत्रीहिमवाहात् उत्पन्नगङगानद्याः प्रधानशाखा चाँपाइनवावगञ्जजिलायाः शविगञ्जोपजिलायाम् वांलादेशस्य प्रविश्य अत्रतः तत्नदी पद्मा इति ...

मञ्जीरा नदी

मञ्जीरा इति गोदावर्याः उपनदी भवति। महाराष्ट्रे माञ्जरा, माञ्ज्रा इति नाम्ना व्यवहरन्ति। इयं नदी महाराष्ट्र-कर्णटक-तेलङ्गाण राज्येभ्यः प्रवहति। महाराष्ट्र राज्ये बीढ् जिल्लायां पटोडा तालुकायां बालघाट् पर्वतश्रेण्याः उत्तरशिखरेषु ८२३ मीटर उपरि जन्म प्राप्य, गोदावर्यां मिलति। अस्यां नद्यां परिवारिक प्रान्तः ३०८४४ किलोमिटर अस्ति। मञ्जीरा नदी सादरणतया पूर्वदिशा, आग्नेयात् महाराष्ट्रे उस्मानाबाद्, कर्णाटकप्रदेशस्य बीदर तथा तेलङ्गाणराज्यस्य मेदकजिल्लातः ५१२किलोमाटर् प्रवत्य, सङ्गारेड्ड्या दिशीं परीवर्त्य उत्तरदिशां प्रविशति। दिशेऽस्मिन् पुनश्च ७५ किलोमाटर प्रवहत्य निजामाबाद् जिल्लयां प्रवहति। १०२ ...

                                     

ⓘ भारतस्य नद्यः

इति श्लोकः भारतीयसंस्कृतौ अविनाभावेन अस्ति । प्रातरुत्थाय भूमौ पादन्यासात् पूर्वं तस्याः क्षमां प्रार्थयति मानवः । तत्र तस्याः वर्णने पर्वताः एव स्थनौ यस्याः सा भूमिः इत्युक्ते पर्वतात् प्रादुर्भूतानां नदीनां जलं जनाः पिबन्ति । अतः भूमातुः स्तन्यं जदीजलम् । भारतस्य संस्कृतौ पर्वतानां नदीनां च तादृशं स्थानं कल्पितम् । नद्यः तु मातृस्थाने विराजन्ते भारतीयहृन्मन्दिरेषु । तासां नामानि अपि स्त्रीप्रत्ययान्तानि एव भवन्ति ।

इति श्लोकं भारतीयाः पूज्यायाः पूर्वं स्नानात् पूर्वम् उक्त्वा प्रयुञ्जमाने यस्मिन् कस्मिन्नेपि जले तासां पुण्यनदीनाम् आह्वाहनं कृत्वा तस्य उपयोगं करोति । नद्यः तु जनानां जीवनस्य अबिभाज्यम् अङ्गम् भवति । देवभूमौ भारते सहस्राधिकाः नद्यः वहन्ति इत्येव अस्य देशस्य सौभाग्यम् ।

                                     
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